राजस्थान वन रिपोर्ट Forest Report 2019

Rajasthan Forest Report 2019. राजस्थान वन रिपोर्ट 2019. भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग, देहरादून द्वारा जारी द्विवार्षिक रिपोर्टISFR रिपोर्ट – पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मन्त्रालयRajasthan Van report 2019.

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History Of Forest In Rajasthan

Rajasthan Van report 2019. rajsthan Forest Report 2019.

  • ब्रिटिश काल में 1854 में लार्ड डलहौजी ने वन विभाग की स्थापना की
  • प्रथम वन निति 1894 में बनाई गयी
  • राजस्थान में वनो के विकास हेतु प्रथम योजना 1910 में जोधपुर रियासत ने बनाई
  • राजस्थान में प्रथम वन कानून 1935 में अलवर रियासत में लागु किया गया
  • स्वतंत्र भारत की प्रथम राष्ट्रीय वन निति 1952 में घोषित की गयी जिसके अनुसार किसी राज्य का 33% वन क्षेत्र तथा पहाड़ी क्षेत्र का 65% या मैदानी क्षेत्र का 20-25% वन क्षेत्र होना आवश्यक है।
  • राष्ट्रीय वन निति 1952 के दिशा निर्देशानुसार राजस्थान, भारत का प्रथम राज्य जिसने वन संरक्षण अधिनियम 1953 बनाया।
  • राजस्थान वन संरक्षण अधिनियम 1953 के अनुसार राजस्थान में वनों को तीन भागों में विभाजित किया गया –
  1. आरक्षित वन (Reserved Forest)
  2. संरक्षित वन (Protected Forest)
  3. अवर्गीकृत वन (Classify Forest)
  • 42 वे संविधान संसोधन 1976 के तहत वन एवं वन्य जीवों के विषय को समवर्ती सूची में शामिल कर दिया गया।
  • भारत में वन संरक्षण हेतु 1980 में भारतीय वन संरक्षण अधिनियम – 1980 बनाया गया।
  • इस अधिनियम के तहत 1981 में “भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग ” (forest survey of india) विभाग की स्थापना देहरादून में की गयी।
  • भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रथम रिपोर्ट 1987 में जारी की गयी।

राजस्थान वन रिपोर्ट 2019 ISFR

rajasthan map forest report

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की फॉरेस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया, स्टेट ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट 2019, (ISFR 2019) के अनुसार, राजस्थान में लगभग 32,737 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र दर्ज किया गया है। यह वन क्षेत्र राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 9.57% और भारत का वन क्षेत्र लगभग 4.28% है। कानूनी स्थिति के आधार पर, सरकार ने इस वन क्षेत्र को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया है।

  1. आरक्षित वन(Reserved) – 12,475 वर्ग किलोमीटर
  2. संरक्षित वन(Protected) – 18,217 वर्ग किलोमीटर
  3. अवर्गीकृत वन(Unclassified) – 2,045 वर्ग किलोमीटर

आरक्षित वन Reserved Forest

इन वनों पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व होता है। इनमें किसी वन सम्पदा का दोहन नहीं कर सकते हैं। राजस्थान में आरक्षित वन के रूप में 12,475 वर्ग किलोमीटर या 38% वन हैं।

संरक्षित वन Protected Forest

इन वनों की देखभाल सरकार द्वारा की जाती है, इन वनों के दोहन के लिए सरकार कुछ नियमों के आधार पर छुट देती है। राजस्थान में संरक्षित वन के अंतर्गत 18,217 वर्ग किलोमीटर या 55% वन क्षेत्र है।

अवर्गीकृत वन Unclassified Forest

अवर्गीकृत वन वे हैं जिनमें पेड़ों के कटने और मवेशियों के चरने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इन वनों में सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करवाकर वन सम्पदा का दोहन किया जा सकता है। राजस्थान में 2045 वर्ग किलोमीटर या 7% क्षेत्र में अवर्गीकृत वन हैं।

स्टेट ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट 2019 राजस्थान: कैनोपी घनत्व के आधार पर वर्गीकरण

rajsthan forest density
  1. बहुत घने जंगल (VDF) – 0.02%
  2. मध्यम रूप से घने वन (MDF) – 1.27%
  3. खुले वन (OF) – 3.57%
  4. स्क्रब – 1.39%
  5. गैर-वन क्षेत्र- 93.75%

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बहुत घने जंगल (Very Dense Forest)

70% और अधिक की कैनोपी घनत्व वाले वन कवर भूमि को बहुत घने वन (VDF) कहा जाता है। राजस्थान में, केवल 77.81 वर्ग किलोमीटर बहुत घने जंगल हैं।

मध्यम रूप से घने वन (Medium Dense Forest)

40-70% की कैनोपी घनत्व वाले वन कवर भूमि को मध्यम घनत्व वन (एमडीएफ) कहा जाता है। राजस्थान में, केवल 4341.90 वर्ग किलोमीटर के घने जंगल हैं।

खुले वन (Open Forest)

10-40% की कैनोपी घनत्व वाले वन कवर के साथ भूमि को ओपन फॉरेस्ट कहा जाता है। राजस्थान में, केवल 12,209.80 वर्ग किलोमीटर खुले जंगल हैं .

स्क्रब्स Scrubs Forest

10% से कम की कैनोपी घनत्व वाली वन भूमि को स्क्रब कहा जाता है। राजस्थान में, लगभग 4760.04 वर्ग किलोमीटर का स्क्रब है।

गैर-वन क्षेत्र

गैर-वन क्षेत्र में वन क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी भूमि शामिल हैं।

Official Website : http://www.fsi.nic.in/

Note:-

  • भारत में सबसे ज्यादा वन मध्य प्रदेश में तथा सबसे काम वन हरियाणा राज्य में है।
  • देश में वन क्षेत्र की दृष्टि से राजस्थान का भारत में 9 वां स्थान है।
  • राज्य में सर्वाधिक वन उदयपुर जिले में है।
  • राज्य में न्यूनतम वन चूरू में तथा इसके बाद हनुमानगढ़ में है।
  • केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर है।

Types Of Forest वनों के प्रकार

शुष्क सागवान वन

ये वन बांसवाड़ा, चितौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर, कोटा तथा बारां में मिलते है। बांसवाड़ा में सर्वाधिक है। ये कुल वनों का 7 प्रतिशत हैं इन वनों में बरगद, आम,तेंदुु,गुलर महुआ, साल खैर के वृक्ष मिलते है।

शुष्क पतझड़ वन

ये वन उदयपुर, राजसमंद, चितौड़गढ़, भीलवाड़ा, सवाई माधाुपुर व बुंदी में मिलते हैं। ये कुल वनों का 27 प्रतिशत हैं। इन वनों में छोकड़ा, आम, खैर , ढाक, बांस, जामुन, नीम आदि के वृक्ष मिलते हैं।

उष्ण कटिबंधीय कांटेदार वन

ये वन पश्चिमी राजस्थान जोधपुर, बीकानेर, जालौर, सीकर, झुंझनू में मिलते हैं। ये कुल वनों का 65 प्रतिशत हैं इन वनों में बबूल, खेजड़ी, केर, बेर, आदि के वृक्ष मिलते है।

उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन

ये वन पश्चिमी राजस्थान जोधपुर, बीकानेर, जालौर, सीकर, झुंझनू में मिलते हैं। ये कुल वनों का 65 प्रतिशत हैं इन वनों में बबूल, खेजड़ी, केर, बेर, आदि के वृक्ष मिलते है।

सालर वन

ये वन अलवर, चितौड़गढ़ सिरोही और उदयपुर में मिलते है।इन वनों से प्राप्त लकड़ी सामान की पैकिंग और फर्नीचर उद्योग में काम आती है।

वन सम्पदा

  • बांस – बांसवाड़ा, चितौड़गढ़, उदयपुर, सिरोही।
  • कत्था – उदयपुर, चितौडगढ़, झालावाड़, बूंदी, भरतपूर।
  • तेन्दुपत्ता – उदयपुर, चितौड़गढ़, बारां, कोटा, बूंदी, बांसवाड़ा।
  • खस – भरतपुर, सवाईमाधोपुर, टोंक।
  • महुआ – डुंगरपुर, उदयपुर, चितौड़गढ़,झालावाड़।
  • आंवल या झाबुई – जोधपुर, पाली, सिरोही, उदयपुर।
  • शहर/मोम – अलवर, भरतपुर, सिरोही, जोधपुर।
  • गोंद – बाड़मेर का चैहट्टन क्षेत्र।

तथ्य

  • तेन्दुपत्ता से बीड़ी बनती है। इसे टिमरू भी कहते है।
  • खस एक प्रकार की घास है। इससे शरबत, इत्र बनते है।
  • महुआ से आदिवासी शराब बनाते है।
  • आंवल चमड़ा साफ करने में काम आती है।कत्था हांडी प्रणाली से कथौड़ी जाति द्वारा बनाया जाता है। कत्थे के साथ केटेचिन निकलती है जो चमड़े को रंगने में काम आति है।

Rajasthan Forest Report 2019

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