MP Art And Culture Notes PDF

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Contents

Art and Culture of MP

मध्यप्रदेश में कला और संस्कृति के अंग

  • लोकगायन (Folk Song)
  • लोकनृत्य (Folk Dance)
  • लोकनाट्य (Folk Theater)
  • लोकचित्रकला (Folk Painting)
  • पर्व, उत्सव, मेले (Festivals & Fairs In MP)
  • शिल्पकला (The Art of Craft)

लोकगीत Folk Song Of MP

लोकगीत लोक के गीत है जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा समाज अपनाता है। सामान्यतः लोक मे प्रचलित, लोक द्वारा रचित एवं लोक के लिये लिखे गए गीतों को लोकगीत कहतें हैं। पारम्परिक संगीत एक विशेष क्षेत्रीयता के प्रभाव को दर्शाता है जो पीढ़ीगत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढी को सौंपे जाते है MP Art And Culture Notes PDF।

मध्यप्रदेश के लोकगीत

  • मालवा :- भरथरी गायन, संजा गीत, हीड़ गायन, बरसाती बारता, निर्गुणी गायन
  • निमाड़:-  कलगी-तुरी,  संत सिंगाजी, मसाण्या या कायाखो, नाथपंथी, गरबा, गरबी, गवलन
  • बुन्देलखण्ड:-  अल्हा गायन, बंबुलिया/भोला, जगदेवा का पुवारा, बैरायटा गायन, देवारी गायन, हरदौली की मनौती
  • बघेलखण्ड:- बसदेवा, बिरहा, बिदेसिया, गायन MP Art And Culture Notes PDF

मालवा के लोकगायन/ गीत

1. भरथरी गायन

  • भरथरी गायन मालवा में गाया जाने वाला गीत है MP Art And Culture Notes PDF।
  • मालवा क्षेत्र में प्रातःकाल नाथ सम्प्रदाय के लोग एकल या सामूहिक रूप मे चिंकारा (सांरगी या इकतारा) पर भरथरी कथा गायन करते है।
  • भरथरी गायन की परम्परागत लोकशैली छत्तीसगढ़ में भी प्रचालित है।
  • भरथरी गायन की प्रख्यात गायिका सुरजबाई खाण्डे (छत्तीसगढ़) का मार्च 2018 में निधन हो गया।
  • चिंकारा प्राचीनतम और पांरपरिक वाद्य यंत्र है। जो नारियल की नट्टी, बॉस और घोड़े के बालों से निर्मित होता है। 
  • चिकारा को बालों से बने धनुष से बजाया जाता है जिसमें से रूँ-रूँ की मधुर ध्वनि निकलती है।
  • भरथरी गीत की विषय वस्तु कबीर, मीरा, भर्तृहरि आदि संतो द्वारा रचित भजनों पर आधारित होती हैं।

2. संजा गायन

  • यह गीत पितृ पक्ष के दौरान संध्या काल में संजा पर्व के अवसर पर गाया जाता है।
  • इसमें गोबर और फूल पत्तियों से संजा की सुन्दर आकृति बनाई जाती है। और शाम को उनकी पूजा-आरती करने के साथ संजा गीत गाती है MP Art And Culture Notes PDF।
  • संजा गीत मूलतः मालवा की अविवाहित लड़कियो द्वारा गाया जाता है।
  • इसमें किसी प्रकार का वाद्य यंत्र नही होता है।
  • 16 वे दिन अविवाहित लड़किया अपनी सहेली सेजा को ससम्मान गीत गाते हुए विदा कर देती है।

3. हीड़ गायन

  • हीड़ गायन मालवा क्षेत्र में श्रावण महीने में गाया जाता है MP Art And Culture Notes PDF।
  • हीड़ गायन होली, दीवाली, जन्माष्टमी, नवरात्री और गोवर्धन पूजा के अवसर पर भी गाया जाता है।
  • हीड़ गायन मूलतः अहीरो के अवदान परक लोक अख्यान कृषि संस्कृति तथा ग्यारस माता की कथा का वर्णन किया जाता है। श्रावण मास में अहीरजन हीड़ गायन की प्रतियोगिता करते है।

4. बरसाती बारता

  • बरसाती बारता गीत मालवा में गाया जाने वाला ऋतु कथा गीत है। जो बरसात के समय गाया जाता है। इसलिए इसे बरसाती बारता कहा जाता है।
  • बरसाती बारता की शैली चम्पू काव्य की तरह होती है जिसमें मालवी गद्य और पद्य दोनों का चरम उत्कर्ष देखा जा सकता है।
  • मालवा के गाँवो में घरो में बैठकर बरसाती बारता रात-रात भर कही और गायी जाती है MP Art And Culture Notes PDF।
  • इसमें ऋतुओं के गीत, ऋतु कथाएँ एवं बारहमासा गीत का सामूहिक गायन होता है।

5. निरगुणी गायन

  • निरगुणी भजनों में कबीर के अध्यात्म की छाप होती है। जिसमें नश्वर शरीर और अमर आत्मा तथा परमात्मा संबंधी तत्वो की सरल प्रतीकों में विवेचना होती है MP Art And Culture Notes PDF।
  • मालवा की निरगुणी गायन बहुत पुरानी है।
  • निर्गुणी गायन को नारदीय गायन भी कहा जाता है।
  • निरगुणी गायन इकतारा और मँजीरे के स्वरों के साथ गाया जाता है।
  • निरगुणी गायन के क्षेत्र में श्री प्रहलाद सिंह टीपणया प्रसिद्ध है

मध्यप्रदेश के लोक नृत्य

1. मालवा के लोक नृत्य

मटकी नृत्य

  • मालवा में मटकी नाच विभिन्न अवसरों पर महिला द्वारा किया जाता हैं।
  • प्रारंभ में एक ही महिला नृत्य करती हैं जिसे ‘झेला’ कहते हैं जिसमें अपने पारम्परिक मालवी कपड़े पहने और चेहने पर धूंघट ओढ़े अन्य महिलाएँ बाद में शामिल होती हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • इस नृत्य में महिलाएँ ढोल की ताल पर नृत्य करती हैं इसे मटकी नाम से जाना जाता हैं।

2. निमाड़ के लोक नृत्य

गणगोर लोक नृत्य

  • पार्वती की प्रतीक गणगौर देवी की मूर्ति की स्थापना गाँव के एक घर में करके सभी महिला और पुरुष रनुबाई और धणियेर सूर्यदेव के रथों को सिर पर रखकर नाचते हैं।
  • यह नृत्य ढोल और थाली की थाप पर किया जाता हैं।
  • गणगौर निमाड़ का धार्मिक लोकनृत्य हैं जो चैत्रमास में गणगौर पर्व के अवसर पर नौ दिनों तक किया जाता हैं।

मांडल्या नृत्य

  • यह नृत्य ढोल और काँसे की थाली के स्वर पर किया जाता हैं।
  • मांडल्या नृत्य महिलाओं द्वारा किया जाता हैं।

काठी नृत्य

  • यह नृत्य देव प्रबोधनी एकादशी से आरम्भ होकर महाशिवरात्री के समय समाप्त होता हैं।
  • नृत्य के साथ गायन में हरिश्चन्द्र भिलणो बाल, सूरियालो महाजन आदि लंबी कथाएँ होती हैं।
  •  काठी नृत्य को चार भगत और दो नृतक की टोली मिलकर करती हैं।
  • काठी नर्तकों की वेशभूषा को ‘बाना’ कहते हैं।
  • काठी नृत्य पार्वती की तपस्या से संबंधीत मातृ पूजक नृत्य हैं।
  • इसका वाद्य यंत्र ढाक कहलाता हैं।

फेफारिया नृत्य

  • फेफारिया निमाड़ का पारंपरिक समूह नृत्य हैं। जिसमें स्त्री पुरुष जोड़ी बनाकर गोल घेरे में नाचते
  • फेफारिया एक प्रकार पुंगी हैं जिसकी आवाज शहनाई से मिलती जुलती हैं।
  • यह नृत्य मुख्यतः विवाह के अवसर पर किया जाता हैं।
  • इस नृत्य में फेफारिया वाद्य यंत्र पाया जाता हैं।

बुन्देलखण्ड लोकनृत्य

कानडा नृत्य

  • बुंदेलखण्ड में कानडा नृत्य धोबी समाज के द्वारा जन्म, विवाह आदि शुभ अवरों पर किया जाता हैं।
  • इस नृत्य में भक्ति आधारित गायन होता हैं जिसमें राम, कृष्ण और शिव की लीलाओं का वर्णन होता हैं।
  • इस नृत्य के मुख्य वाद्य यंत्र: सारंगी, लोटा, ढोलक, मृदंग
  • इसके प्रारंभ में गुरू वंदना की जाती हैं उसके बाद सरस्वती और जानन भगवान की कथा गायी जाती हैं।

राई नृत्य

  • राई बुन्देलखण्ड का प्रसिद्ध लोकनृत्य हैं जो विभिन्न अवसरों पर हर्ष और उल्लास के साथ किया जाता हैं।
  • राई की विराम स्थिति को स्वांग कहते हैं।
  • राई नृत्य के केन्द्र में नर्तकी होती हैं । जिसे वेडनी’ कहा जाता है, जिसे गति देने का कार्य ‘मृदंग वादक’ करता हैं।

बधाई नृत्य

  • यह एकल रूप में और स्त्री पुरुष द्वारा संयुक्त रूप से किया जाने वाला नृत्य हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जन्म, विवाह, मन्नत पुरी होने पर और तीज त्यौहारों पर बधाई नाची जाती हैं।
  • यह नृत्य ढपले, मृदंग, आदि वाद्य यंत्रो पर किया जाता हैं।

सैरा नृत्य

  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र के ग्रामवासी श्रावण माह में और कजली तीज के अवसर पर सैरा नृत्य करते हैं।
  • नर्तक की वेशभूषा साधारण होती हैं जिसमें साफा, बंडी, धोती, कमीज, हाथ में लाल रंग का रूमाल, कमर में पट्टा और पैरों में घुघरू होते हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • सैरा नृत्य पुरुष प्रधान नृत्य हैं जिसमें पुरुष हाथ में डंडा लेकर तथा घेरा बनाकर कृष्ण लीलाओं से संबंधित गीत गाते हुए नृत्य करते हैं।
  • यह नृत्य ढोलक, मंजीरा आदि वाद्य यंत्रों पर किया जाता हैं।

ढिमराई नृत्य

  • ढीमर जाति के लोग इस नृत्य को करते हैं इसलिए इसे ढिमराई नृत्य कहते हैं।
  • इस नृत्य में नर्तक कत्थक के समान परिचालन करता हैं परिचालन ढिमराई नृत्य की प्रमुख विशेषता हैं।
  • सगाई विवाह एवं नवरात्रि आदि अवसरों पर यह नृत्य किया जाता हैं।

जवारा नृत्य

  • बुन्देलखण्ड में समृद्धि के उत्सव के रूप जवारा नृत्य मनाया जाता हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • स्त्री पुरुष दोनों संयुक्त रूप से नृत्य हैं जिसमें स्त्री के सिर पर गेहूँ के उगे हुए जवारे रखी होती हैं।
  • कृषक समुदाय से जुड़ा हुआ यह नृत्य फसल कटाई के समय किया जाता हैं।

नौराता नृत्य

  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र में अविवाहित लड़कियों द्वारा नवरात्री में नौराता नृत्य किया जाता हैं।
  • नौराता नृत्य के जरीये कुंवारी लडकिया एक अच्छे पति की मांग करती हैं।

कलश नृत्य

  • यह बुन्देलखण्ड में नवजाति द्वारा किया जाता हैं।

राछ बधाया नृत्य

  • यह बुन्देलखण्ड का स्त्रीपरक नृत्य हैं।
  • यह विवाह के अवसर पर कन्या पक्ष द्वारा किया जाता है।

बघेलखण्ड लोक नृत्य

बघेलखण्डी राई नृत्य

  • बघेलखण्ड में राई नृत्य पुरुष ही स्त्री का वेश धारण कर नाचते हैं।
  • बुन्देलखण्ड की तरह बघेलखण्उ में भी राई नृत्य का प्रचलन हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • बघेलखण्ड में राई नृत्य ढोलक और नगड़ियाँ पर किया जाता हैं।

बिरहा (अहिराई नृत्य)

  • अहीर जाति में विशेष लोकप्रिय होने के कारण इसे अहिराई नृत्य भी कहते हैं।
  • यह सभी शुभ अवसरों पर किया जाने वाला नृत्य हैं जैसे सगाई, विवाह, दीपावली।
  • बघेलखण्ड में बिरहा गायन के साथ नृत्य भी किया जाता हैं।
  • बिरहा पुरुष प्रधान नृत्य हैं लेकिन महिलाओं के सम्मिलित होने पर यह नृत्य सवाल जवाब शैली में किया जाता हैं।

केमाली नृत्य

  • केमाली नृत्य विवाह के अवसर पर किया जाता हैं। इसे साजन-सजनई नृत्य भी कहते हैं।
  • कैमली नृत्य महिला पुरुष दोनों सवाल जवाब शैली में करते हैं।

कलसा नृत्य

  • बघेलखण्ड में बारात की अगवानी में द्वार पर स्वागत की रस्म होने के पश्चात कलसा नृत्य किया जाता हैं।
  • यह नृत्य नगड़िया, ढोल, शहनाई की धुन पर किया जाता हैं।
  • कलसा नृत्य पुरुष या महिला द्वारा सिर पर सात घड़े रखकर नाचने की परम्परा हैं MP Art And Culture Notes।

दादरा नृत्य

  • इस नृत्य में पुरुष वाद्य यंत्र बजाते हुए गीत गायन करते हैं और महिलाएँ नृत्य करती हैं। लेकिन कभी-कभी पुरुषों के द्वारा की किया जाता हैं।
  • मुख्य वाद्य यंत्र नगड़िया, ढोल, ढ़प
  • दादर नृत्य जातीय गीतों की विशेषताओं के अनुरुप कोटवार, कहार, कोल आदि जनजातियों में प्रसिद्ध हैं।

केहरा नृत्य

  • इस नृत्य में स्त्री और पुरुष दोनों अलग-अलग शैली में नाचते हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • इस नृत्य में फुरहरी नामक एक विशेष मुद्रा में स्त्रियाँ हाथों में हाथ देकर चकरी बनाते हुए नृत्य करती हैं।
  • इस नृत्य में केहरवा ताल बाँसुरी की धुन बजाई जाती हैं।
  • बारी जाति का केहरा नृत्य विशेष लोकप्रिय हैं।

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मध्यप्रदेश के लोक नाट्य

माच लोक नाट्य

  • मध्यप्रदेश सरकार ने माच को राजकीय लोकनाट्य का दर्जा प्रदान किया हैं।
  • माच के प्रवर्तक गुरु या उस्ताद कहलाते हैं।
  • ‘ढोलक’ माच का महत्वपूर्ण वाद्ययंत्र है।
  • मध्यप्रदेश में माच का प्रारंभ उज्जैन को माना जाता हैं।
  • माच नाट्य का प्रारंभ रात्रि के प्रथम पहर में होता हैं।

गम्मत लोक नाट्य

  • निमाड़ क्षेत्र में प्रचलित गम्मत लोकनाट्य लोक जीवन पर आधारित हैं।
  • गम्मत नाट्य नवरात्रि, होली और गणगौर पर्व के अवसार पर किया जाता हैं।
  • इस नाट्य प्रमुख वाद्य यंत्र मृदंग और सांझ होते हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • यह नाट्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों, चौराहा, नुक्कड पर गणेश और सरस्वती की वंदना के पश्चात आरम्भ किया जाता हैं।

स्वांग लोकनाट्य

  • स्वांग बुंदेलखण्ड का पारंपरिक लोकनाट्य हैं ।
  • इसकी विषय वस्तु सामाजिक कुरीतियों एवं समसामयिक घटनाओं से संबंधित होते हैं।
  • इसे राई नृत्य के बीच में हास्य और व्यंग्य के लिये किया जाता हैं।
  • बुन्देलखण्ड के प्रसिद्ध स्वांग जैसे : धतूरा खान, भूरी भैंस, पंडित ठाकुर, ब्याव को स्वांग आदि MP Art And Culture Notes PDF।

छाहुर लोकनाट्य

  • बघेलखण्ड का प्रसिद्ध नाट्य हैं जो कृषक और अहीर जाति द्वारा दीपावली से अष्टमी तक किया जाता हैं।

खंब स्वांग नाट्य

  • कोरकूओं को एक बार मेघनाथ में बड़ी विपत्ति से बचाया था उसी याद कोरकू आदिवासी द्वारा नाट्य का आयोजन करते हैं।
  • कोरकू के गाँव में एक मेघनाथ खंब होता हैं जिसके आसपास नवरात्रि से देव उठनी एकादशी तक कोरकू प्रत्येक रात नए-नए स्वांग खेलते हैं।

जिंदबा लोक नाट्य

  • बघेलखण्ड में विवाह के अवसर में मूलतः महिलाओं द्वारा जिंदबा लोकनाट्य किया जाता हैं।
  • बघेलखण्ड में इसे बहलोल के नाम से भी जाना जाता हैं।
  • पुरुषों के नाट्य देखने पर उन्हें झाडू एवं मूसलों की मार पड़ती हैं।

लकड़बग्घा लोकनाट्य

  • लकड़बग्घा आदिवासी युवक युवतियों का लोकनाट्य हैं, जो खुले मंच पर अभिनीत होता हैं।
  • यह विवाह के बाद खेला जाता हैं। MP Art And Culture Notes PDF जिसमें लड़की को लकड़बग्घा उठा ले जाता हैं। लडकी करूण वन्दन करती हैं
  • आगे चलकर लड़की लकड़बग्घा से प्रेम करने लगती हैं। कुछ युवकजन लकड़बग्घा को तीर मार देते हैं। और लड़की उसकी सेवा करती हैं।
  • इस प्रकार नाट्य में पशु और मानव के परस्पर संयोग का अभिनव प्रस्तुत किया जाता हैं।

रास लोकनाट्य

  • राधा, कृष्ण और गोपियों के विभिन्न प्रसंगों को लकर कीय लीला बघेलखण्ड के गाँवों में जाती हैं।

नौटंकी लोकनाट्य

  • यह बुंदेलखण्ड का एक लोकप्रिय लोक नाट्य हैं।
  • सूत्रधार नौटंकी में प्रमुख पात्र होता हैं MP Art And Culture Notes PDF।
  • इसके प्रारंभ मंगालचरण होता हैं उसके पश्चात् सूत्रधार (रंगा) आता हैं। फिर कथा आरंभ होती हैं।

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